1803-1840 विद्रोह कोली राजपूत


   कोली राजपूत विद्रोह गुजरात 1803 से 1840

गुजरात के खेड़ा जिले पर कब्जा करने के लिए 1803 में British East India Company ने कोलियों के ऊपर #Disarming #Act लगाया जिसके तहत कोली अपने पास हथियार नही रख सकते थे। लेकिन कोली जाती ने इस एक्ट का पुरजोर विरोद किया और मरने मारने पर उतारू हो गए।
इसके बाद अंग्रेजों ने कोली जाती को #Criminal #Tribe घोसित कर दिया। लेकिन कोली मुखियाओं (#कोली राजपूत  #ठाकोर, ) ने कचेरी में अर्जी लगाई की ब्रिटिश सरकार का कोलियों पर कोई अधिकार नही है ये सब बन्द किया जाए लेकिन कुछ नही हुआ।
इसके बाद कोली ज़मीदारों ने ब्रिटिश शासित शहरों और गांव में लूट मार सूरु कर दी। ब्रिटिश सरकार ने कोलियों को चेतबनी दी लेकिन कोलियों ने ब्रिटिश सरकार को नकारते हुए बोला की ये हमारा खानदानी अधिकार ह हम चाहे कुछ भी करें यह हमारा #टैक्स बसूलने का तरीका है और लंबे समय तक कोली इसी तरह ब्रिटिश सरकार की माँ बहन करते रहे।
1808 में कोली राजपूत  और ज्यादा प्रचंड हो गए और अंग्रेजी चमचो और अंग्रेजों को जान से मारने लगे और उनके हथियारों को इखट्टा कर लेते थे।
फरबरी 1808 में कंपनी ने #ब्रिटिश सेना भेजी और कुछ कोलियों को बंदी बना जेल में बंद कर दिया। लेकिन अंधेरा होते होते कोली विद्रोहियों ने जेल पर ही आक्रमण कर दिया। जेल के सभी सिपाही और कर्मचारियों को मार डाला हथियार लूटे और #जेल को तहस नहस करके कोलियों को छुड़ा लिया।
1810 में Britishers ने Anti #Koli Rajput   आर्मी बनाई और बड़े पैमाने पर कोलियों को बंदी बना लिया गया और Prince Of Wales Island पर ले जाया गया और कुछ कोलियों को खेड़ा जेल में रखा गया। इसके बाद 500 कोलियों ने मिलकर खेड़ा जेल पर आक्रमण कर दिया और तगड़ा ही उत्पात मचा दिया सभी कोली आजाद कर लिए। लेकिन जिन कोलियों को #Prince Of Wales Island ले जाया गया उनको नही बचा पाए। इसके बाद कोली और भी ज्यादा खूंखार हो गए।
अंग्रेजों ने अपनी सेना की मात्रा बड़ाई लेकिन कुछ नही हुआ तो अंग्रेजों ने #Baroda #State (वडोदरा #रियासत) से मदद मांगी क्योंकि उनके पास स्थानीय जानकारी सही तरीके से थी और #वडोदरा रियासत ने अपनी सेना बड़ी मात्रा में भेजी ताकि अंग्रेजों के साथ उनके रिसते और मजबूत हों। लेकिन कोलियों ने अंग्रेजी सेना और वडोदरा सेना दोनो को ही मात दे दी।
इसके बाद #अहमदाबाद के ब्रिटिश कलेक्टर ने सुझाब दिए कि उनको सिर्फ कोली मुखियाओं पर ही हमला करना चाहिए और ये सुझाब काम आया। लेकिन इससे सिर्फ कुछ ही कोलियों पर काबू कर पाए थे कोली 1840 तक इसी तरह लड़ते रहे।
1840 के बाद अंग्रेजों को थोड़ा आराम मिला क्योंकि अब कोली ज़मीदारी पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे लेकिन 1857 में फिर से #महाराष्ट्र और #गुजरात के गांव गांव और सहर सहर में कोलियों ने अंग्रेजों के खिलाप #हथियार उठा लिए थे।
VIRCHAND SINGH RATHORE

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