Jay koli Rajput
क्षत्रिय कोली राजपूत मराठा देशमुख साहेब तानाजी मालुसरे :-
तानाजी मालुसरे का पुरा नाम देशमुख साहेब सरदार तानाजी राव मालुसरे था। वो छत्रपती शिवाजी राजे भोसले की मराठा सेना के सेनापति थे।
तानाजी राव मालुसरे महाबलेश्वर रजवाड़े के क्षत्रिय मराठा कोली राजा थे। महाबलेश्वर रजवाड़े मे 40 गांव आते थे।
(लड़ाईयां)
#सिंहगढ की लडाई
टोरणा की लडाई
ढभोल की लडाई
पाली की लडाई
परभनवल्ली की लडाई
चीपलुन की लडाई
संगामेस्वर की लडाई
श्रींगारपुर की लडाई
सिंहगढ की लडाई तानाजी की आख़री लडाई थी। इस लड़ाई में उनकी मौत हो गई लेकिन विजय प्राप्त की।
तानाजी का जन्म महादेव क्षत्रिय मराठा #कोली परिवार में हुआ।
तानाजी मालुसरे #शिवाजी के बचपन के दोस्त थे साथ-साथ बड़े हुए।
तानाजी_का_परिवार
पिता - तानाजी के पिताजी का नाम #देशमुख साहेब कालोजी राव मालुसरे था। जो अपने भाई के साथ मिलकर महाबलेश्वर रजवाड़े पर राज करते थे।
चाचा - #तानाजी के चाचाजी का नाम देशमुख साहेब भंवरजी राव #मालुसरे था जो अपने भाई कालोजी के साथ #महाबलेश्वर #रजवाड़े पर राज करते थे। कालोजी और भंवरजी ने सुल्तान #आदील साह से लडाई लडी जिसमें दोनो भाईयों की मृत्यु हो गई। उसके बाद महाबलेश्वर रजवाड़े को तानाजी और #सुर्याजी मालुसरे दोनों भाईयों ने संभाला।
मां - तानाजी की मां का नाम पार्वती #बाई मालुसरे था। जो कोंडाजी रामजी सेलार (#सेलार_मामा) की बहन थी। कोंडाजी रामजी सेलार भी मराठा सेना मे सेनापति थे। उन्होंने भी तानाजी के साथ सिंहगढ की लडाई लडी। जब तानाजी की मृत्यु हुई तो कोंडाजी रामजी सेलार (सेलार मामा) ने ही उदयभान राठौर को मारा था। उदयभान राठौर मुग़लों का सेनापति था।
भाई - तानाजी के भाई का नाम देशमुख साहेब सरदार #सुर्याजी राव मालुसरे था। सुर्याजी मालुसरे भी मराठा सेना में सेनापति था। सुर्याजी मालुसरे और तानाजी मालुसरे दोनोें भाई महाबलेश्वर रजवाड़े पर राज करते थे।
बेटा - तानाजी के बेटे का नाम देशमुख साहेब सरदार #रायवाजी मालुसरे था। रायवाजी मालुसरे भी छत्रपति शिवाजी राजे भोसले की मराठा सेना में था। तानाजी की मृत्यु के पश्चात छत्रपति शिवाजी राजे भोसले ने रायवाजी मालुसरे को #पारगढ किला दे दिया। और रायवाजी मालुसरे के वंशजों ने देश की आजादी (1947) तक पारगढ रजवाड़े पर राज किया। रायवाजी ने महाबलेश्वर रजवाड़े को पारगढ मे सामिल करके पारगढ को अपनी गद्दी (Seat) बना लिया।
बेटी - तानाजी मालुसरे के घर एक बेटी का जन्म हुआ था जिसका नाम उमाबाई मालुसरे था। उमाबाई का विवाह कलंवे परिवार में हुआ (उमाबाई कलंवे)।
#इतिहास
तानाजी ने 1670 सिंहगढ़ की लडाई लडी जिसके लिए तानाजी प्रसिद्ध है। उस समय सिंहगढ़ का नाम कोंडाना था। तानाजी की मृत्यु के बाद छत्रपति शिवाजी राजे भोसले ने कहा ,गढ तो जीता लेकिन मेरा शेर नही रहा, और कोंडाना का नाम बदलकर सिंहगढ़ (शेर का गढ) रख दिया।
सिंहगढ़ की लडाई मे मुख्य सेनापति तानाजी मालुसरे थे। तानाजी के बाद उनके छोटे भाई सुर्याजी मालुसरे और उनके मामाजी कोंडाजी रामजी सेलार थें। सबसे पहले उन्होंने #मावल क्षेत्र के #कोलीयों को इकट्ठा किया और कोंडाना किले पर हमला कर दिया।
कोंडाना किले पर मुगलों का कब्जा था और मुगलों का सेनापति एक राजपूत था जिसका नाम उदयभान राठौर था। उदयभान राठौर और तानाजी मालुसरे के बिच आमने-सामने की भिड़ंत हुई जिसमें तानाजी मालुसरे की मृत्यु हुई। तानाजी की मृत्यु के पश्चात मराठा कोली #सेना का आत्मविश्वास कमजोर पड गया। फिर लडाई को कोंडाजी रामजी सेलार और सुर्याजी मालुसरे ने संभाला। सुर्याजी मालुसरे ने प्रवेशद्वार पर मोर्चा संभाला और कोंडाजी रामजी सेलार ने मुगल सेनापति उदयभान राठौर के साथ लडाई लडी। जिसमे सेलार मामा ने अपने भांजे का बदला पुरा किया। कोंडाजी रामजी सेलार (सेलार मामा) ने उदयभान राठौर की छाती अपने तलवार घुसेड़ दी। उदयभान राठौर की मृत्यु के बाद मुगल सेना जान बचाकर भागने लगी।
#छत्रपति शिवाजी #राजे #भोसले के पास खबर पहुंचाई गई की हमने #कोंडाना किल्ला तो जीत लिया है लेकिन आपका सेनापति नही रहा उसने वीरगति प्राप्त कर ली है। तो शिवाजी तुरंत ही कोंडाना किले पर पहुंचते हैं और तानाजी मालुसरे के शव को लगे से लगा लेते हैं और बोलते हैं (गढ आला पण सिंह गेला - गढ तो जीता लेकिन मेरा शेर चला गया) और कोंडाना किले का नाम बदलकर सिंहगढ़ (शेर का गढ़) रख देते हैं।
#Tanhaji
Nice
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